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विद्यालय की लचर व्यवस्था से शिक्षा का स्तर बेकार

जहां राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर विद्यालय की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अनेक प्रकार की योजनाएं चला रही है वहीं अध्यापकों की और शिक्षा विभाग की लापरवाही से विद्यालय की व्यवस्था इतनी खराब होती जा रही है कि गांव में शिक्षा का स्तर बिल्कुल ही बेकार होता जा रहा है इतना पैसा सरकार खर्च करती है विद्यालय की व्यवस्था पर भोजन कपड़ा पुस्तक इत्यादि पर पर शिक्षा विभाग इस कदर मौन है कि लगता है सरकारों के आदेश का पालन उनके गले नहीं उतरता है ऐसा ही एक मामला ग्राम पंचायत गोप चंद्रपुर मजरा लाला पुरवा ब्लाक तेजवापुर जनपद बहराइच में उच्च प्राथमिक विद्यालय का सामने आया है इस विद्यालय की व्यवस्था इतनी अच्छी है कि वहां पर तैनात महज एक ही प्रधानाध्यापिका जी हैं शालिनी श्रीवास्तव जी वह भी आए दिन छुट्टी पर रहती हैं एक प्राइवेट व्यक्ति द्वारा विद्यालय में पढ़ाई का कार्य किया जाता है और पढ़ाई करना ही क्या है विद्यालय में कुल 4 बच्चे ही उपस्थित है और समय उस समय 10:00 बजे का था विद्यालय की व्यवस्था इतनी खराब है कि वहां की फर्श पूरी टूटी हुई है बरसात से बचने का भी कोई व्यवस्था नहीं है दीवारे गंदी है ना कोई सफाई की व्यवस्था और ना ही पढ़ाई की व्यवस्था ना अध्यापक ने बच्चे फिर काहे का विद्यालय सोचने का विषय तो यह है कि इस गांव के ग्रामीणों की यह व्यवस्था है कि शिक्षा का स्तर एक भी परसेंट नहीं हो सकता है कि इक्का-दुक्का लोग पढ़े-लिखे मिल जाए बाकी पूरा गांव ही अशिक्षित है ना महिलाएं ना पुरुष और आने वाली पीढ़ी जो नए बच्चों और लड़कियों का है उनके साथ शिक्षा विभाग इस प्रकार से व्यवस्थाएं दे रहा है की राम ही जाने कैसे होगा इन बच्चों के शिक्षा का आधार कैसे होगी पढ़ाई लिखाई गांव के लोग इतना गरीब है कि वह अपने बच्चे को दूरदराज के स्कूलों में भेजने में असमर्थ हैं प्राइवेट विद्यालयों की फीस नहीं दे सकते उनके पास यह मजबूरी है कि सरकारी विद्यालय में बच्चों का पठन-पाठन का कार्य करवाएं और विद्यालय की व्यवस्था यह है कि वहां मात्र एक अध्यापिका जी हैं और पढ़ाई लिखाई का स्तर बहुत ही निचले स्तर का है

रिपोर्ट अर्जुन सिंह के साथ योगेंद्र यादव